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Showing posts from June, 2026

माँ मुंडेश्वरी धाम

माँ मुंडेश्वरी धाम 🚩 कैमूर की पावन धरती पर, पर्वत शिखर विराज, माँ मुंडेश्वरी के चरणों में, झुकता सारा समाज। सदियों से जलती आस्था, भक्ति का अनुपम दीप, माँ की कृपा से खिल उठता, हर जीवन का नसीब। अष्टकोण मंदिर की महिमा, इतिहास जिसका गान, हर पत्थर में बसता जैसे, देवी का वरदान।  शिव और शक्ति संग विराजी, करतीं जग कल्याण, दूर-दूर से भक्त हैं आते, लेकर मन की थान।  घंटों की गूंज, शंखों की ध्वनि, गूंजे चारों ओर, माँ के दर्शन से मिट जाते, दुख-संकट के छोर। हे मुंडेश्वरी जगदम्बे, रखना सब पर ध्यान, तेरे चरणों में समर्पित, मेरा तन-मन-प्राण। जय माँ मुंडेश्वरी! 🚩 - संतोष पांडेय ✍️

भभुआ - कैमूर की शान

भभुआ - कैमूर की शान 🌿🏞️🚩 गंगा की संस्कृति, सोन की पहचान, कैमूर की धरती पर बसता भभुआ महान। जहाँ पर्वत गाते प्रकृति के गीत, हर मोड़ पर मिलता इतिहास और प्रीत। माँ मुंडेश्वरी का पावन धाम, विश्व के प्राचीन जीवंत मंदिरों में जिसका नाम, श्रद्धा जहाँ सदियों से जलती आई, भक्तों ने हर युग में माँ की महिमा गाई। तेल्हार कुंड की गिरती धार, हरियाली ओढ़े कैमूर की पहाड़, शीतल जल की मधुर पुकार, मन को कर दे बार-बार बेकरार। करकट जलप्रपात का अनुपम रूप, जंगल, झरने और प्रकृति का स्वरूप, मगरों की धरती, वन का श्रृंगार, पर्यटकों को खींचे बारंबार। कैमूर वन्यजीव अभयारण्य विशाल, जहाँ गूँजता प्रकृति का सुरमय जाल, हिरण, पक्षी और वन की मुस्कान, धरती का अनमोल वरदान। हर्सू ब्रह्मा, गुप्ता धाम का आशीष, भक्ति में मिलता मन को सुकून विशेष, हर मंदिर में संस्कृति का प्रकाश, हर कदम पर इतिहास का निवास। यहाँ के खेत, यहाँ की बोली, भोले लोगों की मीठी ठिठोली, अतिथि आए तो अपना बन जाए, भभुआ दिल में घर कर जाए। जो खोजे शांति, रोमांच और ज्ञान, भभुआ देता सबको सम्मान, कैमूर का यह अनमोल रत्न, बिहार का गौरव, भारत का धन। आओ भभुआ, आओ कैमू...

विश्व के सबसे प्राचीन जीवंत मंदिर - माँ मुंडेश्वरी धाम

विश्व के सबसे प्राचीन जीवंत मंदिर - माँ मुंडेश्वरी धाम 🚩 कैमूर पर्वत की चोटी पर, इतिहास जहाँ मुस्काए, माँ मुंडेश्वरी के पावन धाम में, श्रद्धा शीश झुकाए। सदियों का गौरव समेटे, अटल खड़ा यह धाम, विश्व के प्राचीनतम जीवंत मंदिरों में, दर्ज है जिसका नाम। पत्थरों में बसती संस्कृति, हर कोना एक प्रमाण, शिव-शक्ति की दिव्य उपस्थिति, देती जग को सम्मान। भोर की पहली किरण यहाँ, भक्ति का दीप जलाए, माँ के चरणों में आया जो, खाली कभी न जाए। न जाने कितनी पीढ़ियों ने, यहाँ आशीष पाया, माँ की कृपा से जीवन में, सुख-समृद्धि को पाया। हे माँ मुंडेश्वरी, तेरी महिमा अपरंपार, तेरे दर पर आकर मिलता, मन को सच्चा प्यार। जहाँ इतिहास भी नतमस्तक है, और आस्था आज भी जीवित है - वही है माँ मुंडेश्वरी धाम। 🙏🚩 जय माँ मुंडेश्वरी माता की जय! ❤️✨ - संतोष पांडेय ✍️ 

शिवशंभू आणि शिवराय

शिवशंभू आणि शिवराय 🔱 जटा विस्कटलेल्या कैलासाचा राजा, त्रिशूळ हाती, नीलकंठ साजा। महादेवाच्या कृपेने या भूमीवर, उगवला सूर्य शिवरायांच्या रूपावर॥ औरंग्याच्या काळ्या सावल्या दाटल्या, मंदिरे, संस्कृती संकटात सापडल्या। तेव्हा शंकराने डोळे उघडले जणू, शिवनेरीवर जन्मले शिवबा म्हणून॥ हर हर महादेवचा झाला जयघोष, मावळ्यांच्या रक्तात उतरला जोश। भगवा फडकला गडकोटांवरी, शिवशंभूची छाया होती स्वराज्यावरी॥ अफजलाचा गर्व जेव्हा आभाळाला भिडला, महादेवाच्या कृपेने वाघनखांनी चिरला। पावनखिंड, सिंहगड, प्रतापगड साक्षी, शिवभक्तांच्या पराक्रमाची अमर गाथा रक्षी॥ शंकर होता ध्यानात महाराजांच्या, धर्मरक्षण होते प्राणांत त्यांच्या। स्वराज्य म्हणजे केवळ राज्य नव्हते, ते महादेवाच्या इच्छेचेच रूप होते॥ आजही जिवंत आहे तोच संदेश, धर्म, संस्कृती, स्वाभिमानाचा आवेश। शिवराय आणि शंकर यांचीच देण, म्हणूनच हिंदवी अस्मिता आहे अजूनही जिवंतपण॥ हर हर महादेवचा नाद घुमू दे, शिवरायांचा आदर्श हृदयी रुजू दे। जोपर्यंत सह्याद्री उभा आहे ताठ, तोपर्यंत शिवशंभू आणि शिवराय अमरच राहतील ठामपाठ॥ 🚩 हर हर महादेव! 🚩 🚩 जय भवानी, जय शिवाजी...

सासवड - इतिहासाच्या पाऊलखुणांवर

सासवड - इतिहासाच्या पाऊलखुणांवर 💯 कऱ्हेच्या शांत तिरी वसले, सह्याद्रीचे ते सुंदर रत्न, सासवड नाव घेताच जागे, महाराष्ट्राचे वैभव अनंत। संत सोपानांच्या चरणांनी, पावन झाली ही भूमी सारी, वारकऱ्यांच्या हरिनामाने, दुमदुमते आजही वारी। पुरंदराच्या अभेद्य किल्ल्याने, राखली स्वराज्याची शान, मुरारबाजींच्या रक्तामधुनी, उजळला शौर्याचा अभिमान। याच भूमीच्या कुशीत वाढला, इतिहासाचा तेजस्वी वारसा, संभाजीराजांच्या जन्मकथेला, इथेच लाभला अमरसा। बाळाजी विश्वनाथांच्या बुद्धीने, उगवली पेशवाईची पहाट, सासवडच्या मातीत रुजली, मराठी सामर्थ्याची वाट। पुरंदरे वाड्यांच्या भिंती, आजही सांगती जुनी गाथा, स्वराज्य, संस्कृती, पराक्रमाची, अजूनही जपती ती व्यथा। संगमेश्वराच्या घंटानादात, भक्तीचा झंकार दाटे, प्राचीन मंदिरांच्या छायेत, इतिहास हलकेच बोलते। कऱ्हेच्या लाटांत उमटलेले, शतकांचे असंख्य स्वर, संत, शूर आणि विद्वानांची, हीच तर भूमी अमर। नाही फक्त गाव एक साधे, नाही केवळ निसर्गाची खाण, सासवड म्हणजे महाराष्ट्राचा, जिवंत इतिहास, जिवंत अभिमान। जेव्हा सह्याद्रीवर सूर्य उगवे, पुरंदर माथा सोन्याचा होई, तेव्हा सासव...